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डार्क इज ब्यूटीफुल | लेख

डार्क इज ब्यूटीफुल

काया और प्रतिमा दो बहने जो एक दूसरे से बेहद प्यार करती थी। काया का रंग सांवला था, जब की प्रतिमा का रंग दूधिया सफेद रूप , रंग और सुंदरता में काया से कहीं ज्यादा आकर्षक और सुंदर । सवाल यह था कि रंग का क्या लेना देना हमारी जिंदगी से? यही बात काया को अंदर ही अंदर से खाई जाती थी, जब मित्र संबंधी और परिवारिक सदस्य उसके सांवले रंग के कारण उसे नीचा दिखाते थे इसी भेदभाव, तुलनात्मक वातावरण में बड़ी हुई थी काया परंतु किसी और की नजरों में वह बहुत खूबसूरत थी वो थी उसकी मां।

कॉलेज का आज पहला दिन था और काया जल्दी उठकर मंदिर गई और फिर कॉलेज के लिए निकल गई और उसे नहीं पता था कि आज का दिन उसकी जिंदगी में ऐसा परिवर्तन लाएगा। सफेद सूट में काया बहुत सुंदर लग रही थी और नितिन से उसकी मुलाकात कक्षा में हुई थी। नितिन को वह बहुत अच्छी लगी नितिन ने उसे कैंटीन जाने को पूछा तो काया ने हां कर दी ।दोनों में काफी बातें हुई नितिन को उसकी सादगी, उसकी बातें, उसकी मुस्कुराहट बहुत पसंद आ गई थी। धीरे-धीरे एक दूसरे के साथ समय बिताते बिताते कब एक दूसरे को इतना अच्छे से जान गए पता ही ना चला।  नितिन हमेशा काया को एहसास दिलाता कि वह कितनी सुंदर है पर काया के मन में जो बचपन से बातें घर कर गई थी कि वह सांवली है, सुंदर नहीं उन बातों को शायद आसान नहीं था उसके मन से निकालना। नितिन जब भी उसकी तारीफ करता है वह सहम सी जाती कि शायद उसका मजाक उड़ाया जा रहा हो पर नितिन जिस नजरिए से उसे देखता उसमें सकरात्मकता भरता, उसे प्रेरित करता कि वह जो चाहे कर सकती है वह प्रतिभाशाली है, सुंदर है, एक दिन इन्हीं बातों को लेकर दोनों में कहासुनी हो गई और उसके सावले रंग से उसकी प्रतिभा कैसे प्रभावशाली हो सकती है? नितिन हमेशा उससे बोलता कि वह बहुत गुणवान है उसके जिंदगी में आगे बढ़ने का कुछ करके दिखाने की प्रतिभा है।

यही से उसकी कहानी में एक नया मोड़ आया ।दोनों अलग हो गए और कभी एक दूसरे से बात ना करने की कसम खाई। इसी बीच काया को देखने वाले घर आए। घर वाले सभी उस दिन यही दुआ कर रहे थे कि काश लड़के वालों को काया पसंद आ जाए कहीं फिर आज उसके काले रंग की वजह से उन्हें शर्मिंदा ना होना पड़े ।लड़के वालों को काया की जगह प्रतिमा सुंदर लगी और काया को फिर उसके सांवले रंग की वजह से काफी कुछ सुनने को मिला। प्रतिमा का रिश्ता पक्का कर दिया गया ।आज फिर काया को उसके सावले रंग के कारण बहुत कुछ सुनने को मिला था वह खुश थी पर अंदर ही अंदर से घुटन महसूस कर रही थी।

कि इसमें मेरा क्या कसूर है अगर मेरा रंग सांवला है ।उस दिन बहुत ज्यादा रोने के बाद उसने अपनी सारी आलोचनाओं को अपनी प्रेरणा बना लिया उस दिन उसने कसम खाई थी आज के बाद में कभी नहीं रोऊंगी और हमेशा आगे बढ़ती जाऊंगी। काया ने अपने लैपटॉप मैं सर्च करना शुरू किया जिसमें बहुत सी मॉडल , अभिनेत्रियां, प्रसिद्ध लेखिकाए, शिक्षक,प्रेरक महिलाएं शामिल थी। वह सब सांवली थी पर वह सफल थी। उसने अपने सांवलापन को पहली बार दूसरों की आलोचना के साथ अपनाया था और वह अंदर से पहली बार बहुत अच्छा महसूस कर रही थी ।अब अगर उसे कोई उसके काले रंग के लिए टिप्पणी करता तो आगे से हस्ती और कहती ‘डार्क इज ब्यूटीफुल’ काया ने अपने आसपास के लोगों को अपनी प्रेरणा बना लिया था। काया ने तय कर लिया था कि वह उन सब स्त्रियों के लिए प्रेरणा बनेगी जिन्हें प्रतिदिन अपने समाज , अपने आसपास, अपने परिवार से यह सुनने को मिलता है कि तू तो काली है।  काया ने जिन का रंग काला था पुरुष और महिला मॉडलों से कांटेक्ट किया और एक सोशल एक्टिविटी के रूप में उन्हें देवी देवताओं के रूप में कपड़े पहनाए और शूट किया और काया ने खुद धन देवी लक्ष्मी को चित्रित करने के लिए फोटोशूट करवाया इस कार्यक्रम के परिणाम आश्चर्यजनक थे। काया को उम्मीद थी कि वह इस कार्यक्रम से कुछ लोगों के दिमाग और सोच बदल देगी कार्यक्रम में काया ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि काला रंग अपने आप में सुंदर है हमें अपनी काली चमड़ी होने से शर्मिंदा नहीं होना चाहिए ना ही किसी की आलोचना करनी चाहिए। आज मैंने यह कार्यक्रम आपके सामने हिंदू देवी देवताओं का फोटो शूट करके किया जिसको आप सब ने इतना प्यार सम्मान दिया तो क्या आप सब इन सभी काले रंग के मॉडलों को असली जीवन मे अपने आसपास के लोगों को स्वीकार क्यों नहीं करते ? उन्हें क्यों हर दिन यह एहसास दिलाया जाता है कि तुम काले हो। भगवान शिव, श्री कृष्ण इसकी उदाहरण है आप सब उनके आगे शीश झुकाते हो फिर स्त्रियों के काले रंग से इतना भेदभाव क्यों ? क्या मनुष्य के अंदर भगवान का वास नहीं है? इतनी देर में नितिन जो कि कार्यक्रम में उपस्थित था उसने खड़े होकर तालियां बजानी शुरू कर दी और धीरे-धीरे पूरा हाल तालियों की गूंज से भर गया। उस दिन काया  को नितिन की बातें समझ आई और काया बहुत-सी स्त्रियों के लिए प्रेरणा बन गई। सच में स्त्रियां समाज का गहना है यह टैगोर जी ने कहा था ।समाज को अपनी सोच बदलनी पड़ेगी के हम स्त्रियां इस समाज का अभिन्न अंग है

डार्क इज ब्यूटीफुल, काला रंग दिव्य है।

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